कथा-कहानी

काकाजी (मेरे पिता)की प्रथम पुण्यतिथि( 19मई2011)पर यह नया ब्लाग शुरु कर रही हूँ जिसमें मेरी अधूरी पडी कहानियों में से कुछ कहानियाँ प्रस्तुत करूँगी । कहानी 'मास्टरसाब'जो पाँच वर्ष पहले अधूरी छोड दी थी ,काफी कुछ काकाजी से ही प्रेरित है । शिक्षक वाले प्रसंग तो पूरी तरह उन्ही के हैं । कहानी को परिपूर्ण तो नही कहा जासकता लेकिन आप सबके विचार मुझे कभी उस स्तर पर ले जाएंगे । इसलिये कृपया मेरी कहानियों को पढें और प्रतिक्रिया भी अवश्य ही दें मेरा उत्साह तो बढेगा ही , एक दिशा भी मिलेगी ।

बुधवार, 12 अगस्त 2026

शहर और फुहारें

›
  “ वसुधा ! सुनले ,अब राखी बाँधने आशू के घर मैं तो नहीं जाऊँगी । उसे जरूरी लगेगा तो खुद ही आजाएगा । ” मैं मेंहदी लगाकर बैठी थी और विचार कर...
3 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 20 जुलाई 2026

एक मौत का विश्लेषण

›
बहुत बुरा हुआ ।  भगवान दुश्मन को भी यह दिन न दिखाए   गल्ला-मण्डी के बाबू रामरज शर्मा के घर कोहराम मचा हुआ था । दरवाजे पर  लोग समा नही रहे थे...
2 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 19 नवंबर 2024

बेदखल

›
  “ बाबूजी ! ” शिवकुमार ने दरवाजे की तरफ से आई वह पतली और हल्की आवाज सुनी नहीं थी या सुनकर अनसुनी करदी थी यह नहीं ठीक से तो नहीं कहा जा स...
2 टिप्‍पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
गिरिजा कुलश्रेष्ठ
जीवन के छह दशक पार करने के बाद भी खुद को पहली कक्षा में पाती हूँ ।अनुभूतियों को आज तक सही अभिव्यक्ति न मिल पाने की व्यग्रता है । दिमाग की बजाय दिल से सोचने व करने की आदत के कारण प्रायः हाशिये पर ही रहती आई हूँ ।फिर भी अपनी सार्थकता की तलाश जारी है ।
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.